Featured post

loading...
loading...

आखिर ममाता बनर्जी को हिन्दुओ से इतनी नफरत और मुसलमानो से इतनी हमदर्दी क्यों है ?



पश्चिम बंगाल की ममता सरकार एक बार फिर विवादों में हैं। सीएम ममता बनर्जी ने मुहर्रम के चलते एक दिन के लिए दुर्गा मूर्ति विसर्जन पर प्रतिबन्ध लगा दिया है जिसके बाद उन पर तुष्टिकरण की राजनीति करने के आरोप लग रहे हैं। 
 
सीएम ममता बनर्जी ने दुर्गा पूजा के बाद मूर्ति विसर्जन को लेकर 30 सितंबर की शाम 6 बजे से लेकर 1 अक्टूबर तक रोक का आदेश दिया है। ममता बनर्जी ने बुधवार को कहा कि मुहर्रम के जुलूसों के चलते दुर्गा प्रतिमा के विसर्जन पर यह रोक रहेगी। श्रद्धालु विजयदशमी को शाम 6 बजे तक ही दुर्गा प्रतिमा का विसर्जन कर सकेंगे। इस साल 1 अक्टूबर को मोहर्रम है। 2016 में दशहरा 11 अक्टूबर को था, जबकि उसके अगले दिन यानी 12 अक्टूबर को मुहर्रम था। पिछले साल भी ममता सरकार ने मोहर्रम को देखते हुए मूर्ति विसर्जन पर रोक लगाने का आदेश दिया था। 
 
जिसके बाद पूरे देश में इसको लेकर काफी विवाद हुआ था। इसे लेकर कोलकाता हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को फटकारा भी था और कहा था कि ये एक समुदाय को रिझाने की कोशिश है। यही नहीं जस्टिस दीपांकर दत्ता की सिंगल बेंच ने 1982 और 1983 का भी उदाहरण दिया, जब दशहरे के अगले दिन ही मुहर्रम मनाया गया था, लेकिन मूर्तियों के विसर्जन पर रोक नहीं लगी थी। भाजपा ने भी इस फैसले को लेकर ममता पर मुस्लिम तुष्टीकरण का आरोप लगाया था। इस साल भी ममता के फैसले से विवाद बढ़ गया है।
पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री पर मुसलमानों के तुष्टिकरण के आरोप हमेशा से लगते रहे हैं। पश्चिम बंगाल के इतिहास में केवल ममता राज में ही दुर्गा मूर्ति विसर्जन पर पाबन्दी लगी है। ममता बनर्जी सरकार ने मुस्लिमों के दवाब में इस वर्ष दुर्गा पूजा पर प्रतिबन्ध लगा दिया हैं। क्योंकि मोहर्रम और दुर्गा पूजा साथ साथ पड़ रहे हैं।
पश्चिम बंगाल में में मुस्लिम आबादी तेजी से बढ़ी है। जहां मुसलमान बड़ी तादाद में होते हैं वे दुर्गापुजा में भी खलल डालते हैं। राज्य में एक ऐसा गांव भी है जहां साल 2012 से दुर्गा पूजा प्रतिबंधित है। इस गांव में रहने वाले हिंदुओं को दुर्गा पूजा का त्योहार आयोजित करने की मनाही है। स्थानीय लोगों ने ऑन रिकॉर्ड इस बात को कहा है। स्थानीय प्रशासन का कहना है कि अगर हिंदुओं को दुर्गा पूजा के आयोजन की अनुमति दी गई तो गांव में सांप्रदायिक तनाव फैल जाएगा। गांव के ही स्थानीय मुस्लिम समुदाय का कहना है कि अगर दुर्गा पूजा की अनुमति दी गई तो उन्हें भी गौ हत्या की इजाजत चाहिए। हकीकत यह है कि मुस्लिम जहां भी बहुसंख्यक हैं वहां हिन्दुओं पर जुल्म ढाते हैं।
यह पहली बार नहीं है जब ममता बनर्जी की सरकार को कलकत्ता हाईकोर्ट से झटका लगा है। वर्ष 2011 में सत्ता में आने के कुछ ही दिन बाद ममता बनर्जी ने मस्जिदों के ईमाम और मोअज्जिन को क्रमश: 2500 रुपए व 3500 रुपए प्रतिमाह भत्ता देने की घोषणा की थी। लेकिन, उच्च न्यायलय ने इसे असंवैधानिक घोषित कर दिया, नतीजतन इमामों के 22 संगठन सड़कों पर प्रदर्शन करने के लिए उतर आये। कोर्ट के फैसले से नाखुश ममता बनर्जी ने एक दूसरा रास्ता निकाला। अब ईमामों और मुअज्जिनों का भत्ता वक्फ बोर्ड के माध्यम से दिया जा रहा है।
 
राजनीतिक जानकार मानते हैं कि ममता बनर्जी की सरकार सत्ता में आने के बाद मुस्लिम तुष्टीकरण का कोई मौका चूकना नहीं चाहती। यहां तक कि अगर मौका नहीं भी मिले, तो सरकार मौके तलाश लेती है। अब सवाल उठता है कि तृणमूल कांग्रेस की सरकार आखिर मुसलमानों को लुभाने की पुरजोर कोशिश क्यों कर रही है? इस प्रश्न का जवाब इन आंकड़ों में मिल सकता है।
 
पश्चिम बंगाल की 9.5 करोड़ की आबादी में 2.5 करोड़ मुसलमान हैं। अर्थात राज्य में 27 फीसदी आबादी मुसलमानों की है। राज्य के 294 विधानसभा क्षेत्रों में से करीब 140 विधानसभा क्षेत्रों में मुस्लिम आबादी निर्णायक भूमिका में है। पिछले विधानसभा चुनावों में तृणमूल कांग्रेस के निर्वाचित 211 विधायकों में 32 मुसलमान हैं।
 
ममता बनर्जी अच्छी तरह से जानती हैं कि चुनाव में उनकी जीत के पीछ मुस्लिमों का बड़ा हाथ है। इसलिए उनका समीकरण बहुत सरल है, मुसलमानों को लुभाओ और चुनावी जीत अपने पाले में कर लो। ममता बनर्जी सरकार ने मुस्लिमों को कई उपहार दिए हैं। विभिन्न मदरसों की करीब 10,000 ऐसी डिग्रियों को मान्यता दी है, जिन्हें पहले मान्यता देने से इनकार कर दिया गया था। 
 
ममता सरकार ने एक संशोधन विधेयक पारित किया, जिसमें 10 फीसदी या उससे अधिक ऊर्दू भाषी आबादी जिन क्षेत्रों में होगी, वहां पर दूसरी आधिकारिक भाषा ऊर्दू होगी। पश्चिम बंगाल में होने वाले विधानसभा चुनाव को देखते हुए मुस्लिम तुष्टीकरण की नीति जहां ममता बनर्जी की मजबूरी है, वहीं तृणमूल कांग्रेस सत्ता में रहने के लिए इस मामले पर सोची-समझी रणनीति के तहत आगे बढ़ रही है।
Source – http://hinduakhbar.com

Comments

loading...