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नई दिल्ली : नोटबंदी की साल गिरह पर पीएम मोदी ने फिर वो कर दिखाया है, जिसका उन्होंने कुछ ही दिन पहले हिमाचल की रैली में वादा किया था. मालिकाना हक के कानूनी सबूत न मिलने पर सरकार ने बेनामी संपत्तियों को अपने कब्जे में लेना शुरू कर दिया है. वहीँ इस खबर से कोंग्रेसी खेमे में मातम पसर गया है, क्योंकि सबसे ज्यादा नुक्सान कोंग्रेसियों का ही होता दिख रहा है. इसी के चलते कोंग्रेसी आरबीआई मुख्यालय के सामने विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं.
अरबों की संपत्ति जब्त
आपको जानकार हैरानी होगी कि मोदी सरकार के नोटबंदी के फैसले के बाद से आयकर विभाग अबतक 1833 करोड़ रुपए की बेनामी संपत्ति जब्त कर चुका है. इसी के साथ सबसे पहले कर्नाटक की कांग्रेस सरकार के ऊर्जा मंत्री डीके शिवकुमार को ही नाप लिया गया है. शिवकुमार की 4000000000 रुपये की संपत्ति जब्त हो गयी है.
बताया जा रहा है कि शिवकुमार ने केवल भारत ही नहीं बल्कि दुनिया के कई देशों में कालेधन से सम्पत्तियाँ खरीदी हुई हैं. इसी साल अगस्त महीने में सबसे बड़ा झटका देते हुए आयकर विभाग के अधिकारियों ने शिवकुमार के घर और उनके अन्य परिसरों पर छापे मारे थे, जहाँ से करीब 300 करोड़ रुपये से ज्यादा की अघोषित आय का पता चला था.
आज से कोंग्रेसियों व् अन्य बईमानों की शामत आयी
6 नवम्बर को एक बार फिर आयकर अधिकारियों ने शिवकुमार और उसके परिवार से 2 घंटे से ज्यादा वक़्त तक कड़ी पूछताछ की और पता लगाया कि 400 करोड़ रुपये की सम्पत्तियों के इनके पास कोई कागजात ही नहीं हैं. जाहिर है सब बेमानी से जनता के पैसों को लूट-लूट कर खरीदी गयी हैं. 400 करोड़ में से 120 करोड़ तो डीके और उनके परिवार के इन्वेस्टमेंट, प्रॉपर्टी, जूलरी और कैश हैं और बाकी शिवकुमार से जुड़ी अन्य कंपनियों के हैं.
6 नवम्बर को एक बार फिर आयकर अधिकारियों ने शिवकुमार और उसके परिवार से 2 घंटे से ज्यादा वक़्त तक कड़ी पूछताछ की और पता लगाया कि 400 करोड़ रुपये की सम्पत्तियों के इनके पास कोई कागजात ही नहीं हैं. जाहिर है सब बेमानी से जनता के पैसों को लूट-लूट कर खरीदी गयी हैं. 400 करोड़ में से 120 करोड़ तो डीके और उनके परिवार के इन्वेस्टमेंट, प्रॉपर्टी, जूलरी और कैश हैं और बाकी शिवकुमार से जुड़ी अन्य कंपनियों के हैं.
बताया जाता है कि शिवकुमार देश के सबसे अमीर नेताओं में से एक है. पूरा मामला अब ईडी को सौंप दिया जाएगा, जांच पूरी होने के बाद शशिकला की तरह शिवकुमार भी 5 साल के लिए जेल जाएंगे. वैसे आपको बता दें कि नोटबंदी के दौरान राहुल गाँधी की ही तरह शिवकुमार ने भी 4000 रुपये निकालने के लिए एटीएम की लाइन में लगने का ढोंग किया था, जबकि इसके पास अरबों रुपयों की अवैध संपत्ति निकली.
बहरहाल, ये तो बस शुरुआत है. ये साफ़ है कि 2019 आते-आते तक कोंग्रेसी नेताओं की अवैध सम्पत्तियाँ जब्त हो चुकी होंगी और देश के ये लुटेरे कंगाल हो चुके होंगे.
source - http://politicalkhabar.in
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