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आज के दलित चिंतक, दलित कम और जिहादी ज्यादा लगते है, हिन्दू विरोध में हो चुके अंधे – DB
आजकल बहुत से दलित चिंतक
दलितों की बात करने वाले बनकर यहाँ वहां घूम रहे है, ये लोग “जय मीम और जय भीम” का नारा बुलंद करते रहते है, खैर
ये दलित चिंतक दलितों की चिंता कम और हिन्दू विरोध अधिक करते है
और जय मीम, जय मीम करते करते ये दलित चिंतक कम और जिहादी अधिक हो चुके है
हिन्दू विरोध में ये लोग इतने अंधे हो चुके है की हिन्दुओ से जुडी किसी भी चीज का ये लोग विरोध करने लगते है
ये लोग हिन्दू विरोध में इतने अंधे हो चुके है की
इनको योग भी ख़राब लगता है, योग से भी इनको नफरत हो चुकी है और योग का भी ये विरोध करते है
जबकि जिस आंबेडकर के नाम पर ये जय मीम भीम वाले दलित चिंतक दलितों को मुर्ख बनाने
का धंधा चलाते है
वो भीमराव आंबेडकर स्वयं योग के प्रबल समर्थक थे, और रोजाना ध्यान और योग करते थे
भीमराव आंबेडकर की दिनचर्या का अहम् हिस्सा था योग और उन्होंने योग पर लेख भी लिखे थे
और इसे शरीर और मन की शुद्धि के लिए बेहद जरुरी बताया था
देश के दलित भोले भाले होते है, ये दलित चिंतको के रूप में जितने भी जिहादी घूम रहे है
ये बड़ी आसानी से दलितों को मुर्ख बनाकर हिन्दू विरोध का जहर उनके मन में भर रहे है, और इन दलित चिंतको का मुख्य कार्य दलित चिंतन नहीं बल्कि हिन्दू विरोध बन चूका है
दलित चिंतको के रूप में घूम रहे जिहादियों को एक्सपोज करना भी बेहद जरुरी है
Source:http://www.dainikbharat.net/2017/06/db_379.html
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